परिचय
कक्षा 9 में हमने परिमेय और अपरिमेय संख्याओं के बारे में पढ़ा था। इन्हें मिलाकर हम वास्तविक संख्याएँ कहते हैं। इस अध्याय में हम वास्तविक संख्याओं के दो बहुत ज़रूरी विचारों पर बात करेंगे:
- यूक्लिड का विभाजन प्रमेयिका - दो धनात्मक पूर्णांकों के HCF (महत्तम समापवर्तक) निकालने का तरीक़ा।
- अंकगणित का मूलभूत प्रमेय - हर भाज्य संख्या को अभाज्य गुणनखंडों के गुणनफल के रूप में लिखा जा सकता है।
इनकी मदद से हम यह भी समझेंगे कि कुछ संख्याएँ (जैसे √2) अपरिमेय क्यों हैं, और कुछ परिमेय संख्याओं का दशमलव विस्तार सांत क्यों होता है।
1. यूक्लिड का विभाजन प्रमेयिका
प्रमेयिका: किसी भी दो धनात्मक पूर्णांक a और b के लिए, ऐसे विशिष्ट पूर्णांक q और r विद्यमान हैं कि:
a = bq + r, जहाँ 0 ≤ r < b
यहाँ q को भागफल और r को शेषफल कहते हैं।
उदाहरण
मान लीजिए a = 455 और b = 42:
- 455 = 42 × 10 + 35
- तो q = 10 और r = 35 (और 0 ≤ 35 < 42, सही है)
HCF निकालने का तरीक़ा (यूक्लिड एल्गोरिथ्म)
दो संख्याओं का HCF निकालने के लिए:
- बड़ी संख्या को छोटी से भाग दो।
- शेषफल अगर 0 है, तो भाजक ही HCF है।
- वरना, भाजक नया a और शेषफल नया b बनाओ। चरण 1 दोहराओ।
उदाहरण: 455 और 42 का HCF निकालिए।
| चरण | समीकरण | भाजक | शेषफल |
|---|---|---|---|
| 1 | 455 = 42 × 10 + 35 | 42 | 35 |
| 2 | 42 = 35 × 1 + 7 | 35 | 7 |
| 3 | 35 = 7 × 5 + 0 | 7 | 0 |
HCF = 7
2. अंकगणित का मूलभूत प्रमेय
हर भाज्य संख्या को अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में लिखा जा सकता है, और यह गुणनखंडन - क्रम छोड़कर - विशिष्ट होता है।
उदाहरण
- 12 = 2 × 2 × 3 = 2² × 3
- 60 = 2 × 2 × 3 × 5 = 2² × 3 × 5
- 156 = 2² × 3 × 13
HCF और LCM निकालना
दो संख्याओं - जैसे 6 और 20 - के लिए:
- 6 = 2 × 3
- 20 = 2² × 5
| 2 | 3 | 5 | |
|---|---|---|---|
| 6 | 1 | 1 | 0 |
| 20 | 2 | 0 | 1 |
- HCF: हर अभाज्य की छोटी शक्ति → 2¹ × 3⁰ × 5⁰ = 2
- LCM: हर अभाज्य की बड़ी शक्ति → 2² × 3¹ × 5¹ = 60
ध्यान दें: HCF × LCM = a × b → 2 × 60 = 120 = 6 × 20 ✓
3. अपरिमेय संख्याएँ
संख्याएँ जो p/q के रूप में नहीं लिखी जा सकतीं (जहाँ p, q पूर्णांक हैं और q ≠ 0), वे अपरिमेय होती हैं।
सिद्ध करें कि √2 अपरिमेय है
विरोधाभास से प्रमाण:
मान लीजिए √2 परिमेय है। तब √2 = p/q, जहाँ p और q के बीच कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं (यानी p/q सरलतम रूप में है)।
- वर्ग करने पर: 2 = p²/q²
- तो: p² = 2q²
- मतलब p² एक सम संख्या है ⟹ p भी सम है।
- तो p = 2k (किसी पूर्णांक k के लिए)।
- फिर: (2k)² = 2q² ⟹ 4k² = 2q² ⟹ q² = 2k² ⟹ q² सम ⟹ q भी सम।
लेकिन तब p और q दोनों 2 से विभाज्य हैं - यह उस मान्यता के विरुद्ध है कि p/q सरलतम रूप में है।
इसलिए √2 परिमेय नहीं हो सकती। √2 अपरिमेय है। ∎
4. परिमेय संख्याओं के दशमलव विस्तार
एक परिमेय संख्या p/q (सरलतम रूप में) का दशमलव विस्तार सांत होता है यदि q का अभाज्य गुणनखंडन 2 और 5 के अलावा कोई और अभाज्य न रखे।
उदाहरण
- 7/8 = 7/2³ → सांत (= 0.875)
- 13/3125 = 13/5⁵ → सांत
- 1/3 → 0.3333… (अनवसानी आवर्ती - क्योंकि 3, न तो 2 है, न 5)
- 1/6 = 1/(2 × 3) → अनवसानी आवर्ती
मुख्य बातें
- यूक्लिड एल्गोरिथ्म से HCF निकाला जाता है।
- मूलभूत प्रमेय: हर भाज्य संख्या का अभाज्य गुणनखंडन विशिष्ट होता है।
- p × q = HCF(p, q) × LCM(p, q)
- √2, √3, √5, π - सभी अपरिमेय हैं।
- p/q का दशमलव सांत है ⟺ q के अभाज्य गुणनखंडन में सिर्फ़ 2 और/या 5 हों।
अभ्यास के लिए सवाल
- यूक्लिड एल्गोरिथ्म से 867 और 255 का HCF निकालिए।
- 12, 15 और 21 का LCM और HCF निकालिए - अभाज्य गुणनखंडन से।
- सिद्ध कीजिए कि √5 अपरिमेय है।
- बिना भाग किए बताइए - क्या निम्नलिखित का दशमलव विस्तार सांत है? (a) 13/3125 (b) 17/8 (c) 64/455 (d) 15/1600
इन सवालों पर अटक जाएँ तो “इस अध्याय पर सवाल पूछें” बटन से शिक्षक को संदेश भेज सकते हैं।